I miss you when…

When I see foams at coffee,

i miss you,

if I wear a saree after long time,

I miss you,

,when I do a new hairstyle,

I miss you!,

I really miss you ..

when I can’t get my work done,

I miss you when..

I am alone on the road ,

I miss you everytime, everywhere,

when I see a couple ,

I miss you,

when someone tells me that you are looking beautiful I miss you.

औरत

# women’s poetry,

सबसे पहले तो मैं सारे पुरुष जाति को सम्मान अर्पित करती हूँ क्योंकि मैं भी किसी पुरुष की पत्नी,बेटी,बहन हूँ ।मेरी इस कविता का उद्देश्य पुरुष का निरादर नहीं है ।अगर स्त्री रचना करती है तो पुरुष के बगैर रचना अकल्पनीय है,गर्व की बात है कि हमारा समाज विकसित हो रहा है औरतों के प्रति नजरिया बदल गया है । दो टूक कहूँ तो यह कविता ऐसे समाज का चित्रण है जहाँ अभी भी औरत केवल वंश वृद्धि और उपभोग की वस्तु है ।🙏

प्रसव पीड़ा सहे जो?

क्या वही औरत है!

जो पालन करे क्या वही औरत है?

सहनशीलता की मूर्ति ?

क्या यही पराकाष्ठा है औरतों की?

हे!पुरुष क्या मूर्ख इतना हो गया तू!

अब स्त्रीत्व का मापदंड!

कितनी पराकाष्ठा? कितनी शक्ति?

तूने कहा कि तू सह!

तूने कहा कि तू ढृढ बन,

तभी तू औरत है,

ना सहे तो रच ना पाएगी संसार अपना,

ना बना सकेगी मुझे अपना,

औरत भी कितनी भोली है,

चुटकी भर सिंदूर से भरती उसकी झोली है

हे पुरुष!तूने कितना सताया है,

कितना मूर्ख उसको बनाया है ।

तू कितना प्रिय है उसका,

क्या तूने कभी प्रेम जताया है?

हे पुरुष!

जा भोग सौंदर्य उसका,

क्या कभी भावनाओं को उसकी छू पाया है?

हमेशा तुम

#love poetry #my blog#unconditional love

तुमसे दूर होकर,कभी नींद नहीं आई मुझको,

आई भी तो तुम भीतर करवटें बदलते रहे,

मेरी डायरी का अहम् हिस्सा हो तुम,

जब भी लिखना चाहा पन्नो में शब्द बनकर तुम हीं उभरते रहे,

आत्मनिर्भरता भी मेरी निर्भर रही तुम पर हीं,

हमेशा तुम साथ चलते रहे,

मेरे आँसू और तुम्हारे भी थे,

जब मुस्कुराई तुम अंदर हँसते रहे,

जब खामोश रही तुम अंदर बातें करते रहे ।

When u r in distance with ur loved one but ur love is still same

मेरी अपेक्षा तुमसे ❤♥️

#lovepoetry,

अपेक्षा है कि अपने कुछ घंटों के,

मिनट में से कुछ पल तुम मुझे देना,

याद रहे कि वे मिनट सिर्फ मेरे होंगे,

हाँ सिर्फ मेरे,

अबकी बार इजाजत नहीं है किसी और को,

हाँ ताकि मेरे जज्बातो के पंछी को पंख लग सके,

और वो तुम्हारे मन के खवाबों का कोई एक तिनका लेकर उङता चले,

फिर एक सुंदर सा आशियां बना सके जिसमें हमारी चाय की चुस्की,

के साथ कुछ गप्पबाजी और चुहल हो

जहाँ सैर करेंगे हम दोनों एक-दूसरे के मन की,

ताकि मेरे आँखों के द्वार से मेरे मन से मेरी आत्मा की पारदर्शिता को तुम जान सकोगे ।

हाँ पर याद रखना कि तुम्हें देने होंगे अपने कुछ घंटों के मिनट में से कुछ पल ।

कर्म

#karmas

कर्मभूमि है कर्मक्षेत्र है,

तुम कर्मपथ पर चलना,

जो किया सो किया कर्म का विशलेषण मत करना,

यही अर्थ है जिंदगी का यही गीता का सार है,

कर्म से ही तो चल रहा संसार है,

शुद्धता विचारों में,

विनम्रता व्यवहार में रख कर,

अहंकार का त्याग करना,

नररूपी नारायण की हीं तुम पूजा करना,

पंचतत्व से बने हो,

पंचतत्व में विलीन हो जाओगे,

क्या संजोकर चलते हो,

खाली हाथ ही जाओगे,

यही कटु सत्य है यही जीवन का आधार है ।

ये युग

#truth, #myfeelings

नाम नहीं लूँगी इस युग का कोई,

ये वो युग है जब तुम्हारी वेदना की तपिश में हाथ सेंकेगे लोग ।

ये वो युग है जब तुम्हारे बनते तमाशे को चलचित्र की तरह देखेंगे लोग,

नाम नहीं लूँगी इस युग का कोई ये वो युग है जहाँ प्रेम में छिपा हुआ है स्वार्थ,

शोहरत में मिलेंगे हजारों हाथ तुम्हें,

वही हाथ पल भर में नकार देंगे ।

सत्य की औकात ही क्या है

सौ असत्य दानवी रूप दिखा देंगे ,

ये वो युग है जब तुम्हारी वेदना की तपिश में हाथ सेंकेगे,

लोग ये वो युग है जब तुम्हारे बनते तमाशे को चलचित्र की तरह देखेंगे लोग ।

प्राणहीन

बेलबूटे जो बनाए थे माशूका ने,उसे सिरहाने रख कर सोता था,

माँ की दी चालीसा भी,

कभी-भी उठानी होती थी कंधे पर बंदूकें उसे,

माँ ने बनवाया था होली का कुर्ता भी,

कुछ सौदर्यप्रसाधन और माँ की साङियाँ भी ली थी उसने,

प्रणय को स्मरण हो भावविभोर होता था जो,

कुछ बेलबूटे वाले रूमाल और भी बने पङे है

आज वो लौट पङा है पङा है प्राणरक्षा में प्राणहीन होकर।

शहीदों को हमेशा नमन

मेरी कल्पना में एक दुनिया

यह कविता मेरे हृदय के काफी करीब है

काश! कि पूरी धरती एक परिवार होती,हाँ

वसुधैव कुटुंबकम् “

ओह!मैंने सोचा है कि मानवता हीं एक जाति है ।ना कोई गोरा है ना कोई काला है,

मैंने सोचा है कि एक ऐसा ग्रह है जहाँ एक हीं भाषा है,वो भी प्रेम की,

जहाँ मैंने सुमति देखी है,

जहाँ सब एक हैं,

वहाँ धर्म के नाम पर बँटा नहीं है कोई भी,

यह दुनिया इतनी खूबसूरत है कि, अभिशाप नहीं है किसी का भी जीवन यहाँ,

सभी खुश है संतोष की सीमा नहीं है जहाँ,

उस जगह पर कोई प्रतिशोध नहीं है,

जहाँ हर चार कदम पर ना शहर बदलता है,ना कालोनी बदलती हैं ,

ना देश बदलता है ना वेशभूषा बदलती हैं,

यहाँ सच है कि सब एक है, हाँ मैंने “वसुधैव कुटुंबकम्” का एक सपना देखा है ।

तभी तुम मेरे हो ♥️

#lovepoetry ,#myfeelings#mythoughts,

ढाँढस मत बँधाओ मुझे कि तुम तो मेरे हो

कि तुम मेरे पास हो मेरे नजदीक हो,झूठा संतोष मत दो मुझे,

मंजूर नहीं है झूठा भरोसा तुम्हारा,

तुम करीब रहो मेरे हर पल तभी तुम मेरे हो,

उदासी में तुम्हारे कंधे हो तभी तुम मेरे हो ,

तुम्हारा हर्ष हो मेरे उत्साह में तभी तुम मेरे हो,

असमंजस की स्थिति में संभाला करो मुझे तभी तुम मेरे हो ।

प्रेम में समर्पण विरले ही मिलता है

मैं अकेली हूँ

#lovepoetry ,#myfeelings,

मैं अकेली हूँ बहुत अकेली

बस तुम हाथ बढ़ाना ,ज्यादा नहीं सुन लेना दो चार बातें मेरी और कुछ कह लेना।

आत्मोथान जरूरी है और विकास भी,

पर उसका क्या जो आत्मा हीं मरने तुल्य हो,

जरूरत है कि कोई इसे सीचे फिर भी कोई ना मिले,

तुम मुझे मिलो बस एक बार आग्रह है कि बस एक बार देखना मेरी तरफ़ और पढना मेरे नयन,,

नहीं-नहीं अश्रुधारा नहीं है मेरे नयन में,

बस आग्रह है,आशा है ,निवेदन है मेरे नयन में,मैं अकेली हूँ बहुत अकेली बस तुम हाथ बढ़ाना ज्यादा नहीं सुन लेना दो चार बातें मेरी और कुछ कह लेना ।

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