सलाइयाँ धैर्य की

सलाइयाँ ली थी मैंने धैर्य की, और धागे लिए थे, विश्वास के,फिर बुनती रही, वक्त बेवक्त, ना जाने कब, कैसे, कयों ये सलाइयाँ मिली,

ना जाने कब कैसे धागे मिले, विश्वास के,

मुश्किलों को नजरअंदाज कर मैं बुनती रही, विश्वास के धागे से शाँत मैं बुनती रही, क्या बात थी कि सलाइयाँ कभी कमज़ोर ना पङी,

पर धागे कइ बार टूटे, पर मैं जोङती रही उन धागों को,साथ ही गाँठो को छुपाती भी रही, और फिर विश्वास के धागे से विश्वास ही बना,

विश्वास की लिहाफ़,

वो लिहाफ़ फिर प्रेम की चादर बन गयी थी, मेरा पूरा आवरण हीं प्रेम हो चला था, कयोंकि मैंने सलाइयाँ ली थी धैर्य की,और धागे लिए थे विश्वास के,,और अब ये प्रेम की चादर ढक रही है मुझे विश्वास की लिहाफ़ भी ।

Let me live

Hey! my enemy, my anger

I know you will destroy me,

I wanna leave you,

I wanna beat you,

See!see!please don’t come,

I know you don’t want to see me happy,

You don’t want to see me smile,

Hey! My high pitch, I know you are the best friend of my enemy,

Just leave me,

Let me smile,

Let me live,

Let me live in peace,

Let me achieve success,

I know u will hide my all goodness,

U will destroy my bright side,

Please forgive me, let me live

Anger is worse enemy

वहम

कुछ तो है भीतर मेरे जो बाह्य नहीं है,

कुछ है जो सोया है यूँ ही अंदर, किसी और ने तो नहीं, मैंने हीं बाँधा हुआ है खुदको खुद से ही अंदर, और ये वहम जो एकांत का है एकांत नहीं ये एकांत क्या है जब कोई पास था हीं नहीं,,एकांत हीं सत्य है यूँ ही शाँत है बाह्य प्रतिमूर्ति मेरी, यह भी वहम, मन तो उङ रहा है आकाश में परिंदो की भाँति,,फिर भी सत्य है कि यूँ ही तकती हूँ बैठी हूँ जमीन तकती हुइ।।

स्री

सिसक उठती हूँ अकेले में कभी सोचकर

क्या गलती थी उसकी जिसे यूँ ही नोचा गया,

हूँ बिलख उठती यह सोचकर कि कयों स्री हीं निशाना है हर बार,

सोचो जो प्रेम गीत लिखती थी स्वछन्द उङाने कल्पना में भरती थी

जब भी चाहा पसारना पंख कयों उसे क़ैद किया गया स्त्री मरयादा है तो कयों तङपायी गयी?

इच्छापूरक की इच्छा कयों दबायी गयी,?

सम्मान की जगह भावनात्मक ठेस पहुंचायी गयी, तङप उठती हूँ मैं यह सोचकर स्त्री कितनी भी स्वाभिमानी हो हमेशा स्त्री हीं रूलायी गयी ।

मैं चाहती हूँ

मैं चाहती हूँ कि ना उकेरू कुछ छंद अपने प्रियतम के लिए, ना ही बयान करनी है मुझे प्रेम मंशा, चाहती हूँ लिखना उस रूह के लिए जो हवस की भूख का निवाला बनी, मैं चाहती हूँ लिखना उस रईसों के भंडारों को कि अकाल मृत्यु भी होती है कहीं ।लिखना चाहती हूँ बेईमान राजनीतिक दलों को कि मत करो बरबाद देश हमारा, मैं चाहती हूँ लिखना उनके लिए जो देश हित को हमसे दूर हुए, नहीं बनना है मुझे वरिष्ठ लेखिका ना शोहरत का लालच है, मेरे शब्द संदेश बने मैं चाहती हूँ ।

जिंदगी तुम

आसान नहीं था समझना तुम्हें

फिर भी तुम्हें समझ रही हूँ,

तुम में हीं सुलझा रही हूँ तुम्हें,

तुमने खुशी भी दी है और रुलाया भी है,

कभी -कभी रहस्य लगीं मुझे तुम तो कभी तुम वरदान लगी,तुम मिली हो मुझे समझ रही हूँ तुम्हें, देखो तुम कभी कैसी हो तो तुम कभी कैसी हो,कभी तो तुम खुश होती हो, कभी तो तुम रूठ जाती हो,

बहुत प्यारी हो, पता है जो भी हो समझ रही हूँ तुम्हें,

कयोंकि मुझे पता है, कि कैसे भी मुझे तुम्हें जीना होगा जिंदगी, तुम जिंदगी हो ना कोई जिंदगी से मुह कैसे मोङे।

सिर्फ तुमसे कृष्ण

(कृष्ण के लिए मेरे हृदय में प्रेम तरूणावस्था से रहा है,,,,)

मैंने बहुत ढूँढा तुम्हें जाने कहाँ कहाँ

ढूँढा तुम्हें तारों के टिमटिमाते प्रकाश में, चंद्रमा की दूधिया रोशनी में पर तुम नहीं मिले,

कहीं नहीं था तुम्हारा आस्तित्व,

मैंने बहुत ढूँढा तुम्हें जाने कहाँ कहाँ ढूँढा तुम्हें सुगंधमयी फूलों में, अपनी हर तान हर सुरों में,

पर तुम नहीं मिले कहीं नहीं था तुम्हारा आस्तित्व, तभी जैसे दिल सोकर जागा था, महसूस किया कि तुम तो मेरे दिल में हो मेरे रग- रग में हो ,मेरे रोम- रोम में हो जरूरत थी महसूस करने की, जो आज हुआ है, मुझे तुमसे तुमसे सिर्फ तुमसे कृष्णा प्यार हुआ है ।

_आराधना सिंह

अपेक्षा

अपेक्षा है कि अपने कुछ घंटों के मिनट में से कुछ पल तुम मुझे देना, याद रहे कि वे मिनट सिर्फ मेरे होंगे, हाँ सिर्फ मेरे,

अबकी बार इजाजत नहीं है किसी और को, ताकि मेरे जज्बातो के पंछी को पंख लग सके।,और वो तुम्हारे मन का कोइ एक तिनका लेकर उङता चले,

फिर एक बहुत ही सुन्दर सा आशियां बना सके,जिसमें हमारी चाय की चुस्कीयो के साथ कुछ गप्पबाजी और चुहल होगी,जहाँ सैर करेंगे हम दोनों एक-दूसरे के मन की, ताकि मेरे आँखों के द्वार से मेरे मन से मेरी आत्मा की पारदर्शिता को तुम जान सकोगे, हाँ पर याद रखना कि तुम्हें देने होंगे अपने कुछ घंटों के मिनट में से कुछ पल जो सिर्फ मेरे होंगे ।

Self love

अपने आप को खोना हीं सबसे बड़ा दोष है ।तभी तुम खो देते हो वह सब भी जो तुम्हें प्रिय है, तुम रोते जाते हो आँसू बहाए जाते हो,किसी वस्तु के लिए, पर सच तो यह है कि तुमने खोया है सिर्फ और सिर्फ खुद को ।तभी यह अंजाम मिला है तुम्हें, पहले खुद से प्यार करें खुद को पा लें,,फिर तुम वह सब पा लोगे जो तुम्हें प्रिय है ।

घोंसले खवाबों के

मेरे खवाबों के घोंसले जीर्ण-शीर्ण ना हो,

इसलिए मैंने तुम्हारे साथ बीते लम्हों की यादों के तिनकों से उन्हें सुरक्षित रखा है,

सील कर दिये है दरवाजे भी मैंने सारे

क्योंकि अब कोई, हानि ना होने पाए उन खवाबों को ऐसा ध्यान रखती हूँ ।

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