खवाबों के घोंसले

#lovepoetry

मेरे खवाबों के घोंसले जीर्ण शीर्ण ना हो,

इसलिए मैंने तुम्हारे साथ बीते लम्हों की यादों के तिनकों से उन्हें सुरक्षित रखा है,

सील कर दिये हैं सारे दरवाजे भी मैं ने,

कोई क्षति ना होने पाए उन खवाबों को ऐसा ध्यान रखती हूँ ।

Published by Aradhana Singh

Poet by heart by soul

7 thoughts on “खवाबों के घोंसले

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