प्राणहीन

बेलबूटे जो बनाए थे माशूका ने,उसे सिरहाने रख कर सोता था, माँ की दी चालीसा भी, कभी-भी उठानी होती थी कंधे पर बंदूकें उसे, माँ ने बनवाया था होली का कुर्ता भी, कुछ सौदर्यप्रसाधन और माँ की साङियाँ भी ली थी उसने, प्रणय को स्मरण हो भावविभोर होता था जो, कुछ बेलबूटे वाले रूमाल औरContinue reading “प्राणहीन”

मेरी कल्पना में एक दुनिया

यह कविता मेरे हृदय के काफी करीब है काश! कि पूरी धरती एक परिवार होती,हाँ “वसुधैव कुटुंबकम् “ ओह!मैंने सोचा है कि मानवता हीं एक जाति है ।ना कोई गोरा है ना कोई काला है, मैंने सोचा है कि एक ऐसा ग्रह है जहाँ एक हीं भाषा है,वो भी प्रेम की, जहाँ मैंने सुमति देखीContinue reading “मेरी कल्पना में एक दुनिया”

तभी तुम मेरे हो ♥️

#lovepoetry ,#myfeelings#mythoughts, ढाँढस मत बँधाओ मुझे कि तुम तो मेरे हो कि तुम मेरे पास हो मेरे नजदीक हो,झूठा संतोष मत दो मुझे, मंजूर नहीं है झूठा भरोसा तुम्हारा, तुम करीब रहो मेरे हर पल तभी तुम मेरे हो, उदासी में तुम्हारे कंधे हो तभी तुम मेरे हो , तुम्हारा हर्ष हो मेरे उत्साह मेंContinue reading “तभी तुम मेरे हो ♥️”

मैं अकेली हूँ

#lovepoetry ,#myfeelings, मैं अकेली हूँ बहुत अकेली बस तुम हाथ बढ़ाना ,ज्यादा नहीं सुन लेना दो चार बातें मेरी और कुछ कह लेना। आत्मोथान जरूरी है और विकास भी, पर उसका क्या जो आत्मा हीं मरने तुल्य हो, जरूरत है कि कोई इसे सीचे फिर भी कोई ना मिले, तुम मुझे मिलो बस एक बारContinue reading “मैं अकेली हूँ”

नि:शब्द

#hiddenfeelings, #lovepoetry,#love, अपनी नि:शब्दता को विराम दो, कुछ अल्फाज़ कह डालो या पन्ने पर उतार दो । मौन तुम्हारा कचोटता है मुझे, अब हृदय को आराम दो । हृदयपटल पर प्रेम अंकित है तो हृदयानुभूति को आकार दो , बंद है संगीत प्रेम का अब तो मलहार दो , अब प्रेम को विस्तार दो, अबContinue reading “नि:शब्द”

सलाइयाँ धैर्य की

सलाइयाँ ली थी मैंने धैर्य की, और धागे लिए थे, विश्वास के,फिर बुनती रही, वक्त बेवक्त, ना जाने कब, कैसे, कयों ये सलाइयाँ मिली, ना जाने कब कैसे धागे मिले, विश्वास के, मुश्किलों को नजरअंदाज कर मैं बुनती रही, विश्वास के धागे से शाँत मैं बुनती रही, क्या बात थी कि सलाइयाँ कभी कमज़ोर नाContinue reading “सलाइयाँ धैर्य की”

वहम

#hiddenfeelings,#myfeelings#mythoughts, कुछ तो है भीतर मेरे जो बाह्य नहीं है, कुछ है जो सोया है यूँ ही अंदर, किसी और ने तो नहीं, मैंने हीं बाँधा हुआ है खुदको खुद से ही अंदर, और ये वहम जो एकांत का है एकांत नहीं ये एकांत क्या है जब कोई पास था हीं नहीं,,एकांत हीं सत्य हैContinue reading “वहम”

स्री

सिसक उठती हूँ अकेले में कभी सोचकर क्या गलती थी उसकी जिसे यूँ ही नोचा गया, हूँ बिलख उठती यह सोचकर कि कयों स्री हीं निशाना है हर बार, सोचो जो प्रेम गीत लिखती थी स्वछन्द उङाने कल्पना में भरती थी जब भी चाहा पसारना पंख कयों उसे क़ैद किया गया स्त्री मरयादा है तोContinue reading “स्री”

मैं चाहती हूँ

#myfeelings#mythoughts, मैं चाहती हूँ कि ना उकेरू कुछ छंद अपने प्रियतम के लिए, ना ही बयान करनी है मुझे प्रेम मंशा, चाहती हूँ लिखना उस रूह के लिए जो हवस की भूख का निवाला बनी, मैं चाहती हूँ लिखना उस रईसों के भंडारों को कि अकाल मृत्यु भी होती है कहीं ।लिखना चाहती हूँ बेईमानContinue reading “मैं चाहती हूँ”

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