मैं तुम बन जाती हूँ ।

#lovepoetry, तुमसे दूर होंने के बाद चंद्रमा को निहारती रहती हूँ अपलक, मैं कविताएँ भी लिखती हूँ, कभी-कभी सन्नाटे में अपनी सिसकियाँ खुद ही सुनती हूँ, ओढ़े रहती हूँ एक अदृश्य आवरण, ये बारिश की बूँदें भी सताती है मुझे, मैं कहीं भी देखती रहती हूँ बिना किसी कारण लगातार तुम नहीं हो पर मैंContinue reading “मैं तुम बन जाती हूँ ।”

I wanna say the truth

#hiddenfeelings,#emotions,#pain Listen, i saw you yesterday , Was that a dream? No! That was not a dream! That was truth, I saw you, I saw you again, You were smiling, But,you were hiding something from me, May be that was some of your thoughts,some of your feelings, Listen, I know what was that, I wannaContinue reading “I wanna say the truth”

औरत

# women’s poetry, सबसे पहले तो मैं सारे पुरुष जाति को सम्मान अर्पित करती हूँ क्योंकि मैं भी किसी पुरुष की पत्नी,बेटी,बहन हूँ ।मेरी इस कविता का उद्देश्य पुरुष का निरादर नहीं है ।अगर स्त्री रचना करती है तो पुरुष के बगैर रचना अकल्पनीय है,गर्व की बात है कि हमारा समाज विकसित हो रहा हैContinue reading “औरत”

हमेशा तुम

#love poetry #my blog#unconditional love तुमसे दूर होकर,कभी नींद नहीं आई मुझको, आई भी तो तुम भीतर करवटें बदलते रहे, मेरी डायरी का अहम् हिस्सा हो तुम, जब भी लिखना चाहा पन्नो में शब्द बनकर तुम हीं उभरते रहे, आत्मनिर्भरता भी मेरी निर्भर रही तुम पर हीं, हमेशा तुम साथ चलते रहे, मेरे आँसू औरContinue reading “हमेशा तुम”

मेरी अपेक्षा तुमसे ❤♥️

#lovepoetry, अपेक्षा है कि अपने कुछ घंटों के, मिनट में से कुछ पल तुम मुझे देना, याद रहे कि वे मिनट सिर्फ मेरे होंगे, हाँ सिर्फ मेरे, अबकी बार इजाजत नहीं है किसी और को, हाँ ताकि मेरे जज्बातो के पंछी को पंख लग सके, और वो तुम्हारे मन के खवाबों का कोई एक तिनकाContinue reading “मेरी अपेक्षा तुमसे ❤♥️”

कर्म

#karmas कर्मभूमि है कर्मक्षेत्र है, तुम कर्मपथ पर चलना, जो किया सो किया कर्म का विशलेषण मत करना, यही अर्थ है जिंदगी का यही गीता का सार है, कर्म से ही तो चल रहा संसार है, शुद्धता विचारों में, विनम्रता व्यवहार में रख कर, अहंकार का त्याग करना, नररूपी नारायण की हीं तुम पूजा करना,Continue reading “कर्म”

ये युग

#truth, #myfeelings नाम नहीं लूँगी इस युग का कोई, ये वो युग है जब तुम्हारी वेदना की तपिश में हाथ सेंकेगे लोग । ये वो युग है जब तुम्हारे बनते तमाशे को चलचित्र की तरह देखेंगे लोग, नाम नहीं लूँगी इस युग का कोई ये वो युग है जहाँ प्रेम में छिपा हुआ है स्वार्थ,Continue reading “ये युग”

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