When I see foams at coffee, i miss you, if I wear a saree after long time, I miss you, ,when I do a new hairstyle, I miss you!, I really miss you .. when I can’t get my work done, I miss you when.. I am alone on the road , I miss youContinue reading “I miss you when…”
Author Archives: Aradhana Singh
औरत
# women’s poetry, सबसे पहले तो मैं सारे पुरुष जाति को सम्मान अर्पित करती हूँ क्योंकि मैं भी किसी पुरुष की पत्नी,बेटी,बहन हूँ ।मेरी इस कविता का उद्देश्य पुरुष का निरादर नहीं है ।अगर स्त्री रचना करती है तो पुरुष के बगैर रचना अकल्पनीय है,गर्व की बात है कि हमारा समाज विकसित हो रहा हैContinue reading “औरत”
हमेशा तुम
#love poetry #my blog#unconditional love तुमसे दूर होकर,कभी नींद नहीं आई मुझको, आई भी तो तुम भीतर करवटें बदलते रहे, मेरी डायरी का अहम् हिस्सा हो तुम, जब भी लिखना चाहा पन्नो में शब्द बनकर तुम हीं उभरते रहे, आत्मनिर्भरता भी मेरी निर्भर रही तुम पर हीं, हमेशा तुम साथ चलते रहे, मेरे आँसू औरContinue reading “हमेशा तुम”
मेरी अपेक्षा तुमसे ❤♥️
#lovepoetry, अपेक्षा है कि अपने कुछ घंटों के, मिनट में से कुछ पल तुम मुझे देना, याद रहे कि वे मिनट सिर्फ मेरे होंगे, हाँ सिर्फ मेरे, अबकी बार इजाजत नहीं है किसी और को, हाँ ताकि मेरे जज्बातो के पंछी को पंख लग सके, और वो तुम्हारे मन के खवाबों का कोई एक तिनकाContinue reading “मेरी अपेक्षा तुमसे ❤♥️”
कर्म
#karmas कर्मभूमि है कर्मक्षेत्र है, तुम कर्मपथ पर चलना, जो किया सो किया कर्म का विशलेषण मत करना, यही अर्थ है जिंदगी का यही गीता का सार है, कर्म से ही तो चल रहा संसार है, शुद्धता विचारों में, विनम्रता व्यवहार में रख कर, अहंकार का त्याग करना, नररूपी नारायण की हीं तुम पूजा करना,Continue reading “कर्म”
ये युग
#truth, #myfeelings नाम नहीं लूँगी इस युग का कोई, ये वो युग है जब तुम्हारी वेदना की तपिश में हाथ सेंकेगे लोग । ये वो युग है जब तुम्हारे बनते तमाशे को चलचित्र की तरह देखेंगे लोग, नाम नहीं लूँगी इस युग का कोई ये वो युग है जहाँ प्रेम में छिपा हुआ है स्वार्थ,Continue reading “ये युग”
प्राणहीन
बेलबूटे जो बनाए थे माशूका ने,उसे सिरहाने रख कर सोता था, माँ की दी चालीसा भी, कभी-भी उठानी होती थी कंधे पर बंदूकें उसे, माँ ने बनवाया था होली का कुर्ता भी, कुछ सौदर्यप्रसाधन और माँ की साङियाँ भी ली थी उसने, प्रणय को स्मरण हो भावविभोर होता था जो, कुछ बेलबूटे वाले रूमाल औरContinue reading “प्राणहीन”
मेरी कल्पना में एक दुनिया
यह कविता मेरे हृदय के काफी करीब है काश! कि पूरी धरती एक परिवार होती,हाँ “वसुधैव कुटुंबकम् “ ओह!मैंने सोचा है कि मानवता हीं एक जाति है ।ना कोई गोरा है ना कोई काला है, मैंने सोचा है कि एक ऐसा ग्रह है जहाँ एक हीं भाषा है,वो भी प्रेम की, जहाँ मैंने सुमति देखीContinue reading “मेरी कल्पना में एक दुनिया”
तभी तुम मेरे हो ♥️
#lovepoetry ,#myfeelings#mythoughts, ढाँढस मत बँधाओ मुझे कि तुम तो मेरे हो कि तुम मेरे पास हो मेरे नजदीक हो,झूठा संतोष मत दो मुझे, मंजूर नहीं है झूठा भरोसा तुम्हारा, तुम करीब रहो मेरे हर पल तभी तुम मेरे हो, उदासी में तुम्हारे कंधे हो तभी तुम मेरे हो , तुम्हारा हर्ष हो मेरे उत्साह मेंContinue reading “तभी तुम मेरे हो ♥️”
मैं अकेली हूँ
#lovepoetry ,#myfeelings, मैं अकेली हूँ बहुत अकेली बस तुम हाथ बढ़ाना ,ज्यादा नहीं सुन लेना दो चार बातें मेरी और कुछ कह लेना। आत्मोथान जरूरी है और विकास भी, पर उसका क्या जो आत्मा हीं मरने तुल्य हो, जरूरत है कि कोई इसे सीचे फिर भी कोई ना मिले, तुम मुझे मिलो बस एक बारContinue reading “मैं अकेली हूँ”