#lovepoetry ,#myfeelings,
मैं अकेली हूँ बहुत अकेली

बस तुम हाथ बढ़ाना ,ज्यादा नहीं सुन लेना दो चार बातें मेरी और कुछ कह लेना।
आत्मोथान जरूरी है और विकास भी,
पर उसका क्या जो आत्मा हीं मरने तुल्य हो,
जरूरत है कि कोई इसे सीचे फिर भी कोई ना मिले,
तुम मुझे मिलो बस एक बार आग्रह है कि बस एक बार देखना मेरी तरफ़ और पढना मेरे नयन,,
नहीं-नहीं अश्रुधारा नहीं है मेरे नयन में,
बस आग्रह है,आशा है ,निवेदन है मेरे नयन में,मैं अकेली हूँ बहुत अकेली बस तुम हाथ बढ़ाना ज्यादा नहीं सुन लेना दो चार बातें मेरी और कुछ कह लेना ।

बस तुम मेरी सुन लेना और अपनी कह लेना
सहज सरल भाव प्रवण लेखन
बहुत सुंदर
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Dhanyawad 🙏
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I have read you first time, It seems I have to read every thing wrote by you. Behtreen
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Thank you it’s means a lot to me
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