आकलन #lovepoetry,

देखा था कल रात भी मैंने शायद कुछ ढूँढ रहे थे तुम ,

मेरी बातों में मेरी आँखों में,

हाँ मुझे पता है कि तुम ढूँढ रहे थे अपनी ही गलतियाँ,

तुम तलाश रहे थे खुद को कि तुम कहाँ हो,

हाँ तुम नहीं थे मेरी बातों में,

शिकायतें भी नहीं थी,

मैंने नहीं कहा तुम्हें,

क्योंकि तुम आकलन कर सको यही मैं चाहती हूँ,

मैं परिपक्व बनाना चाहती हूँ तुम्हें इतना कि तुम समझ सको कि हाँ तुम सही नहीं हो,

जो तुम हमेशा बन जाते हो ।

Published by Aradhana Singh

Poet by heart by soul

23 thoughts on “आकलन #lovepoetry,

  1. Very touched by the last line.

    हाँ तुम सही नहीं हो,

    जो तुम हमेशा बन जाते हो । Waah.

    Very realistic and original thought. Keep Shining.

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  2. बहुत ही खूबसूरत रचना।
    ढूंढते रह जाएंगे कमियाँ,
    गलतियां करने में माहिर तबतक
    आकलन नही कर पाएंगे,
    जबतक
    सबकुछ खो नही जाएंगे।

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