वो और बारिश

#lovepoetry  #rain #repost

बारिश के नाम से ही खिलखिला पङती थी,

क्या तुम्हें भींगना पसंद है?

हमेशा पूछती,चलो ना भींगते हैं,

कितना प्यारा था उसका

बारिश में भींगना

और उसका बारिश को महसूस कर सकना,

हाँ उसका महसूस करना थोङा अलग सा था ,

कुछ ऐसा जैसे वो बारिश की हर बूंद को जानती थी,

बारिश उसकी अपनी जागीर थी,जैसे

बरस बीते मैं उसकी बारिश में भीगने की यादों में भीगता रहता था ।

तन तो नहीं पर मन भींग जाता था मेरा,

हाल ही में बताया मैंने उसे की मैं भींगता रहता हूँ तुम्हारी यादों में,

उन बारिश की यादों में मन भिगोता रहता हूँ

स्तब्ध रह गया जब उसने कहा

जब से तुम गए हो यहाँ बारिश हुई हीं नहीं

Published by Aradhana Singh

Poet by heart by soul

13 thoughts on “वो और बारिश

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