आत्मा का टुकड़ा

तुम्हारा नाम लिख डाला था मैंने बादलों के छोटे-छोटे टुकड़ों पर,

जानते हो फिर बारिश हुई!

बारिश की हर एक बूँद पर तुम्हारा हीं नाम था,

और मैंने देखा कि वो बूँदें सींच रही थी मेरी साँसों को,

सुनो तुम कभी उदास मत होना,

मेरी” आत्मा का एक टुकड़ा “तुम्हारे हीं पास रहता है,

मेरे बदन पर तुम्हारी खुशबू वैसे है

जैसे तुमने अभी अभी छुआ हो ।

Published by Aradhana Singh

Poet by heart by soul

25 thoughts on “आत्मा का टुकड़ा

  1. निश्छल निःस्वार्थ प्रेम को दर्शाता आपकी यह कविता मन के तारों को झंकृत करती है।
    कन्हैया सिंह

    Liked by 1 person

Leave a comment

Design a site like this with WordPress.com
Get started