बेलबूटे जो बनाए थे माशूका ने,उसे सिरहाने रख कर सोता था,
माँ की दी चालीसा भी,
कभी-भी उठानी होती थी कंधे पर बंदूकें उसे,
माँ ने बनवाया था होली का कुर्ता भी,
कुछ सौदर्यप्रसाधन और माँ की साङियाँ भी ली थी उसने,
प्रणय को स्मरण हो भावविभोर होता था जो,
कुछ बेलबूटे वाले रूमाल और भी बने पङे है
आज वो लौट पङा है पङा है प्राणरक्षा में प्राणहीन होकर।

🎉🙏🎉
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