नि:शब्द

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अपनी नि:शब्दता को विराम दो,

कुछ अल्फाज़ कह डालो या पन्ने पर उतार दो ।

मौन तुम्हारा कचोटता है मुझे,

अब हृदय को आराम दो ।

हृदयपटल पर प्रेम अंकित है तो हृदयानुभूति को आकार दो ,

बंद है संगीत प्रेम का अब तो मलहार दो ,

अब प्रेम को विस्तार दो,

अब निःशब्दता को विराम दो,

अब हृदय को आराम दो ।

कभी कभी रिश्ते में चुप्पी सही है लेकिन इसकी भी एक सीमा है

Published by Aradhana Singh

Poet by heart by soul

3 thoughts on “नि:शब्द

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