एक आत्मा भावना उकेरने वाली,,

बारिश को कई देर तक देखा करती थी, वो निर्विकार, चुपचाप,

बैठी रहती कई देर तक,

ना जाने कयों शायद किसी मंथन में

उसकी बातें सिर्फ वो हीं जान सकती थी

उसकी भावना भी, और शायद उसकी डायरी, उसकी डायरी में उसकी सारी बातें उकेरी होती थी, आदतन अपनी बातें भावनाए वो उकेरती थी कागज पर ।

Published by Aradhana Singh

Poet by heart by soul

6 thoughts on “एक आत्मा भावना उकेरने वाली,,

      1. लिखते रहिये और हो सके तो मेरी पोस्ट भी पढ़ियेगा। आशा करता हूँ पसंद आएगा आपको।

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