वहम

#hiddenfeelings,#myfeelings#mythoughts,

कुछ तो है भीतर मेरे जो बाह्य नहीं है,

कुछ है जो सोया है यूँ ही अंदर, किसी और ने तो नहीं, मैंने हीं बाँधा हुआ है खुदको खुद से ही अंदर, और ये वहम जो एकांत का है एकांत नहीं ये एकांत क्या है जब कोई पास था हीं नहीं,,एकांत हीं सत्य है यूँ ही शाँत है बाह्य प्रतिमूर्ति मेरी, यह भी वहम, मन तो उङ रहा है आकाश में परिंदो की भाँति,,फिर भी सत्य है कि यूँ ही तकती हूँ बैठी हूँ जमीन तकती हुइ।।

Published by Aradhana Singh

Poet by heart by soul

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