मैं चाहती हूँ

#myfeelings#mythoughts,

मैं चाहती हूँ कि ना उकेरू कुछ छंद अपने प्रियतम के लिए, ना ही बयान करनी है मुझे प्रेम मंशा, चाहती हूँ लिखना उस रूह के लिए जो हवस की भूख का निवाला बनी, मैं चाहती हूँ लिखना उस रईसों के भंडारों को कि अकाल मृत्यु भी होती है कहीं ।लिखना चाहती हूँ बेईमान राजनीतिक दलों को कि मत करो बरबाद देश हमारा, मैं चाहती हूँ लिखना उनके लिए जो देश हित को हमसे दूर हुए, नहीं बनना है मुझे वरिष्ठ लेखिका ना शोहरत का लालच है, मेरे शब्द संदेश बने मैं चाहती हूँ ।

Published by Aradhana Singh

Poet by heart by soul

8 thoughts on “मैं चाहती हूँ

  1. आप अच्छा लिखते हैं थोड़ा सा अच्छी तरह प्रदर्शित करिये चाहे छोटी हो या बड़ी कविता/लेख। उसी से सम्बद्ध फ़ोटो भी अवश्य डालिये।

    Liked by 2 people

Leave a comment

Design a site like this with WordPress.com
Get started